मेहनत-का-मोल-हिंदी-कहानी-Mehnat-Ka-Mol-Hindi-Kahani

Mehnat Ka Mol Hindi Kahani | हिंदी कहानी – मेहनत का मोल


हिंदी कहानी –  मेहनत का मोल | Hindi Kahani -Mehnat Ka Mol

परिचय : यह कहानी एक ऊँट के अंतर्मन की दिलचस्प कहानी है। जो यह बताता है कि एक दोस्त मेहनती होता है और दूसरा आलसी तथा किस प्रकार आलसी दोस्त ने मेहनत का मोल समझकर अपना आलस्य को दूर भगाया।

हिंदी कहानी –  मेहनत का मोल

दो दोस्त थे, जिनका नाम रामू और श्यामू था। उनके पास एक ऊँट भी था। जिसे वे दोनों अपना दोस्त मानते थे, जानवर नहीं। रामू और श्यामू दोनों ही व्यापारी थे। वे दोनों एक साथ एक ही घर में रहते थे।
रामू जहाँ बहुत ही मेहनती था वहीं श्यामू आलसी व्यक्ति था। मगर रामू अपने दोस्त श्यामू की आलसीपन से जरा भी परेशान नहीं होता था। श्यामू को वह अपने दोस्त के साथ-साथ भाई भी मानता था और उसे छोटे भाई की तरह प्यार भी करता था।
बदले में श्यामू भी रामू की बहुत इज्जत करता था। परन्तु वह अपने आलसीपन के आगे बेबस हो चूका था। बहुत कोशिश के बाद भी वह अपनी इस गंदी आदत से बाहर नहीं आ पा रहा था।
ऊँट को अपने मालिक श्यामू की इस गंदी आदत पर अन्दर ही अन्दर गुस्सा आता रहता था। ऊँट अक्सर सोचा करता कि उसका मालिक रामू अपने आलसी दोस्त को क्यों अपने साथ रखे हुए हैं। उनसे अच्छा तो मैं ही हूँ। एक जानवर हो कर भी अपने मालिक का हर काम करता हूँ जो वो मुझसे करवाते हैं।
मेहनत का मोल हिंदी कहानी | Mehnat Ka Mol Hindi Kahani
मेहनत का मोल हिंदी कहानी | Mehnat Ka Mol Hindi Kahani
बात उस दिन की है जब ऊँट का गुस्सा उसके सिर के ऊपर चला गया। उस दिन तो उसका मालिक श्यामू ने आलसीपन की हदें ही पार कर दी। जब वह अपने कमरें में बिस्तर पर चादर ओढ़े लेटा हुआ था और अपने दोस्त रामू से अपने बिस्तर पर ही भोजन लाने का आग्रह करने लगा।
रामू ने  श्यामू के लिए भोजन बिस्तर पर ही दे दिया। परन्तु श्यामू से इतना भी नही बना कि उठकर वह भोजन ग्रहण करे। वह रामू से कहता है कि भोजन मेरे मुहँ में खिला दो। मेरे हाथ में तेज दर्द हो रहा है। रामू ने तुरंत सारा भोजन श्यामू को उसके मुहँ में खिला दी। हद हो तब हो गई जब श्यामू, रामू के द्वारा बनाये भोजन को स्वादहीन बताया।
ऊँट यह सब दृश्य अपनी आँखों से दरवाजा के बाहर से खड़े होकर देख रहा था।  ऊँट का मन हो रहा था कि वह जाकर अपने आलसी मालिक को सबक सिखाए। परन्तु वह लाचार था। अपने मालिक को दंड देकर वह पाप का भागी नहीं बनना चाहता था। उसे बस एक सही समय का इंतजार था। जो उसके आलसी मालिक को सबक सिखाए।
भगवान ने बहुत जल्दी ही ऊँट के मन की बात पढ़ ली। वह समय भी आ गया जब रामू को व्यपार के सिल-सिले में शहर से बाहर जाना पड़ा। रामू ने अपने ऊँट को बड़े प्यार से तैयार किया और शहर चलने के लिए कहा। जाते-जाते अपने दोस्त श्यामू को भी अपना ध्यान रखने के लिए कहा।
ऊँट मन-ही-मन बहुत प्रसन्न हो रहा था और सोच रहा था कि अब उसके आलसी मालिक को अच्छा सबक मिलेगा जब सारा काम खुद से करना पड़ेगा। ऊँट बड़े ही मस्त मौला चाल से ख़ुशी-ख़ुशी आगे बढ़ने लगा। मगर रामू को ऊँट की यह मस्ती और ख़ुशी का कारण नहीं समझ आ रहा था।
ऊँट ने अपने शब्दों में यह कहा कि आप मेरी इस ख़ुशी का कारण नहीं समझेंगें मालिक। ऊँट ने जैसे अपने मालिक की मन की बात पढ़ ली हो और वह मंद-मंद मुस्कुराने लगा।
मेहनत का मोल हिंदी कहानी | Mehnat Ka Mol Hindi Kahani
मेहनत का मोल हिंदी कहानी | Mehnat Ka Mol Hindi Kahani
कुछ दिन पश्चात् दुसरे शहर से जब रामू और उसका ऊँट वापस घर लौटा तो देखा कि श्यामू खाना खा रहा था। आश्चर्य की बात यह थी कि श्यामू की थाली में अधपका और अधजला भोजन पड़ा था। जिसे देखकर यह पता चलता है कि भोजन उसने बड़े ही बेमन से बनाया हो।
मगर श्यामू उस खाने को बड़े ही स्वाद के साथ और प्रेम से खा रहा था। ऊँट यह बात समझ नहीं पा रहा था कि यह वही उसका मालिक श्यामू है जो रामू के स्वादिष्ट भोजन को भी स्वादहीन बताया था।
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रामू और ऊँट को अपनी ओर अचरज भरी निगाहों से देखते हुए वह सारी बात समझ गया था कि वे दोनों क्या सोच रहे थे। श्यामू ने अपने मित्र को तरो-ताजा होकर भोजन ग्रहण करने को कहा और ऊँट के पास जाकर बोला – तुम यही सोच रहे हो न कि आज यह श्यामू इतना खराब भोजन कैसे खा रहा है।
तो सुनो इसमें मेरी कड़ी मेहनत छुपी है इसलिए वह स्वादहीन भोजन भी स्वादिष्ट लग रहा था। उसके बाद श्यामू ऊँट के पास से मुस्कुराते हुए चला गया और अपने काम में लग गया।
ऊँट भी ख़ुशी से उछलता हुआ नाचने लगा। आख़िरकार उसके आलसी मालिक का आलस्य दूर भाग गया था।

शिक्षा : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी मेहनत से प्राप्त सफलता छोटी हो या बड़ी उसका मूल्य अनमोल होता है।


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