ऊँट और सियार की कहानी

ऊँट और सियार की कहानी


 

ऊँट और सियार की कहानी
ऊँट और सियार की कहानी
 

ऊँट और सियार की कहानी

ऊँट और सियार की कहानी : ऊँट और सियार दो मित्र थे। दोनो अक्सर साथ-साथ रहते थे। दोनो मित्र जंगल में घूम कर थक चूके थे। ऊँट को मनपसंद भोजन नहीं मिलने के कारण वह खुद को भूखा महसूस कर रहा था।

 
दोनो मित्र अच्छे भोजन की तलाश में निकल गए। रात बहुत ज्यादा हो गई थी। वे दोनो दूर किसी गाँव की तरफ निकल गए। दोनो ने देखा कि गाँव की खेत में चने की अच्छी फसल लगी है।
 
चने की खेत देखकर सियार के मुहँ में पानी आ गया और वह चने को ऊँट से पहले खाने का मन बना लिया। सियार अपनी चालाकी दिखाते हुए ऊँट को मनवा लिया कि पहले वह चना खाएगा और फिर बाद में उसका मित्र ऊँट

सियार अपने मित्र ऊँट को यह कहकर समझाया की जब वह चना खाएगा तब सियार खेत की पहरेदारी करेगा ताकि जब खेत का मालिक आए तो उसको आगाह कर सके।
 
भोला-भाला ऊँट अपने मन में यह सोचकर गद-गद हो गया कि उसका मित्र उसके लिए इतना फिक्रमंद है। ऊँट तुरंत तैयार हो गया और सियार को पहले चना खाने को कह दिया। चना खाकर सियार का पेट पूरी तरह से भर गया था।

सियार ने अपने मित्र ऊँट को चना खाने को कह दिया और खुद खेत की पहरेदारी करने चला गया। ऊँट ख़ुशी से झूमता हुआ खेत के अंदर चला गया और बड़े ही चाव से स्वाद लेता हुआ चना खाने लगा।

उधर, सियार का पेट पूरी तरह से भरा होने के कारण जम्हाई आने लगी। सियार अपनी जम्हाई को रोकने का प्रयास कर रहा था क्योंकि उसका मित्र ऊँट खेत में चना खा रहा था।

परन्तु सियार अपनी आदत के अनुसार अपनी हुआ-हुआ की आवाज़ को रोक न सका और अपनी पूरी शक्ति हुआ-हुआ करने में लगा दी।

सियार की आवाज़ सुनकर खेत का मालिक दौड़ता हुआ खेत की तरफ भागा। ऊँट अपने ऊपर आनेवाली परेशानी को भाँप गया था और वह बिना पेट भरे ही खेत से भागा।

ऊँट सियार के पास जाकर बोला कि उसे हुआ-हुआ करने की क्या आवश्यकता थी? आज तुम्हारे इस आदत की वजह से मैं मार खाते-खाते रह गया।

इसपर, सियार बोला – हुआ-हुआ करना तो सियार की आदत ही नहीं आचरण भी होता है। ऊँट को समझ आ गई थी दो असमान आचरण वालों की मित्रता हमेशा साथ नहीं देती।

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शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता हमेशा एक जैसी आचार और विचार रखने वालो में ही सफल होती है।


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