बुरी संगत – शेर और भेड़िए की कहानी

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बुरी संगत – शेर और भेड़िए की कहानी: एक दिन एक जवान शेर जंगल में अकेले घूम रहा था। तभी उसने एक भेड़िए को झाड़ियों में देखा। भेड़िए ने भी शेर को देखा और डर गया। उसने यह सोचा कि अगर वह भागने की कोशिश की तो शेर उसे जरूर मार डालेगा। इसलिए वह स्वयं शेर के पास गया और कहा- प्रिय महोदय आप बहुत दयालु दिखते हैं। यदि आप मुझे अपनी मांद में ले जाएंगे और अपने परिवार के साथ रहने दे तो मैं आपके परिवार की सेवा करूंगा।

उसने आगे कहा- मैंने अपने जीवन में ऐसा राजसी युवा शेर पहले कभी नहीं देखा। इस जवान शेर को उसके पिता और मां ने बार-बार कहा था कि वह किसी भी भेड़िए से दोस्ती ना करें। लेकिन वह भेड़िए की चिकनी-चुपड़ी बातों से प्रभावित हो गया। शेर भेड़िए को मांद में ले जाने के लिए राजी हो गया।

शेर और भेड़िए की कहानी
शेर और भेड़िए की कहानी

शेर और भेड़िए की कहानी

शेर और भेड़िए की कहानी: शेर के माता-पिता यह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा भेड़िए के साथ घूमे। लेकिन शेर हर बार उनके मना करने के बावजूद उनकी बातों को अनसुना कर देता था। उन्हें डर था कि किसी दिन भेड़िए की वजह से शेर मुसीबत में पड़ जाएगा। एक दिन भेड़िए को घोड़े का मांस खाने की तीव्र लालसा हुई। वह शेर के पास गया और हाथ जोड़कर कहा- महाशय, ताजा घोड़े के मांस के अलावा कुछ भी ऐसा नहीं है जो हमने नहीं खाया है। मैंने सुना है कि इसका स्वाद बहुत ही स्वादिष्ट होता है।

शेर को भी घोड़े का मांस खाने का मन हुआ। शेर ने भेड़िए को उस स्थान पर ले जाने के लिए कहा, जहां घोड़े विचरण करते हैं। भेड़िया, शेर को एक तालाब के किनारे पर ले गया। जहां कुछ घोड़े नहाने आए थे। शेर एक झाड़ी के पीछे छुप गया और एक बढ़िया घोड़े को पकड़कर वह वापस अपनी मांद में भाग गया।

शेर के पिता ने उसे चेतावनी दी। मेरे बेटे, घोड़े इस राज्य के राजा का है। उनके पास कई कुशल तीरंदाज है। यदि आप एक और घोड़े की जान ली तो आप अपने जीवन को खतरे में डालेंगे। लेकिन युवा शेर जल्द ही घोड़े के मांस का स्वाद का आदि हो गया। भेड़िया भी शेर के साथ घोड़े के मांस का स्वाद चख रहा था।

जल्द ही राजा के कानों तक यह बात पहुंची की एक शेर उनके घोड़े का शिकार कर रहा है। राजा अपने घोड़े को शेर से सुरक्षित रखने के लिए शहर के अंदर बड़ा सा पानी का टैंक बनवाया। जहां घोड़े नहा सके। लेकिन शेर किसी तरह शहर में घुस गया और नहाते हुए घोड़े को मार डाला। तब राजा ने अपने आदमियों को घोड़े को साही अस्तबल में रखने का आदेश दिया। यह सोच कर कि शेर शाही अस्तबल में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं करेगा। परंतु शेर शाही अस्तबल में भी घुस गया और घोड़े को उसके अस्तबल में ही मार डाला।

अंत में राजा ने सबसे कुशल धनुर्धर को बुलाया और उसे शेर को मार गिराने का आदेश दिया। अगले दिन जब शेर शाही अस्तबल की दीवार पर घोड़े की तलाश में उछला तो उसे तीरंदाज ने तीर से घायल कर दिया। उसने दर्द में भेड़िए को पुकारा। मेरे दोस्त मेरी मदद करो।

भेड़िया एक घोड़े के साथ शेर के लौटने का इंतजार कर रहा था। लेकिन जब उसने मदद के लिए उसकी पुकार सुनी तो वह समझ गया कि शेर पकड़ा गया है। बिना समय गवाएं व घने जंगल में भाग गया। अपने माता-पिता की सलाह को ना मानकर अपनी बुरी संगत पर पश्चाताप करते हुए शेर अपनी जान से हाथ धो बैठा।

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