खुशी हमारे अंदर है – नैतिक कहानी | Khushi Hamare Andar Hai – Moral Story In Hindi

खुशी हमारे अंदर है - नैतिक कहानी (Khushi Hamare Andar Hai - Moral Story In Hindi): एक बार एक व्यक्ति अपने सांसारिक जीवन से ऊब गया था। उसके पास वह सब कुछ था जिसकी उसे चाहत थी।

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खुशी हमारे अंदर है – नैतिक कहानी (Khushi Hamare Andar Hai – Moral Story In Hindi): एक बार एक व्यक्ति अपने सांसारिक जीवन से ऊब गया था। उसके पास वह सब कुछ था जिसकी उसे चाहत थी। एक अच्छा परिवार, घर, पैसा, अच्छा स्वास्थ्य सब कुछ था उसके पास। परंतु इन सब के रहते हुए भी वह उदास रहता था। उसे खुशी महसूस ही नहीं होती थी। जिसके कारण वह अक्सर मायूस रहता था।

Khushi Hamare Andar Hai - Moral Story In Hindi
Khushi Hamare Andar Hai – Moral Story In Hindi

एक दिन वह एक साधु के आश्रम में गया। वह अपनी परेशानी साधु को बताया। साधु महाराज के पूछने पर, वह अपननी पारिवारिक स्थिति के बारे में बताया। साधु को समझते देर नहीं लगी कि वह आखिर खुश क्यों नहीं है? साधु ने उस व्यक्ति को समझाने के लिए एक छोटी सी कहानी सुनाई।

कहानी कुछ इस प्रकार थी। एक गांव था। उस गांव में दो सगी बहने रहती थी। भाग्यवश बड़ी बहन की शादी धनी घर में हो गई और छोटी बहन की शादी गरीब के घर में। बड़ी बहन के घर में एशों आराम की सारी चीजें थी। लेकिन छोटी बहन घर ज्यादा पैसे नहीं थे। उन्हें हर चीज-सोच समझ कर करना पड़ता था। काफी वर्षों बाद दोनों बहने इकट्ठा हुई। वे दोनों मेले में घूमने गई। बड़ी बहन को मेले में हर चीज छोटी लगती। उसे कोई भी चीज लुभा नहीं पाया। जबकि छोटी बहन मेले का खूब आनंद लिया।

क्योंकि, वह गरीब होने के कारण मेला-हाट नहीं जा पाती थी। वह काफी वर्षों बाद अपनी बहन के साथ मेला घूमने गई थी। जब बड़ी बहन को अपनी छोटी बहन को खुश होता देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हो रहा था। वह सोच रही थी कि इस मेले में ऐसी क्या बात है, जो वह इतनी खुश हो रही है। क्योंकि बड़ी बहन के लिए यह सब बातें छोटी थी। इसलिए ना तो उसे कुछ फर्क पड़ रहा था और ना तो वह खुश हो रही थी। उसके लिए यह आम बात थी।

साधु यह कहानी सुना कर उस व्यक्ति को यह समझाना चाहा कि तुम्हारी उदासी का हल इस कहानी में छुपी हुई है। वह व्यक्ति कुछ समझ नहीं पाया। उसने साधु महाराज से पूछा- वह कैसे महाराज? साधु बोले – जिस व्यक्ति को जीवन में सारी चीजें आसानी से मिल जाती है, वह उसका मोल नहीं समझता है। बिना कष्ट से प्राप्त खुशी को इंसान समझ ही नहीं पाता है और वह खुशी के लिए इधर-उधर भटकता रहता है। जबकि, उसकी खुशी उसके पास ही होती है। जिस प्रकार हमारे भगवान हमारे अंदर हैं, हमारी सोच में है। ठीक उसी प्रकार खुशी हमारे अंदर है, हमारे विचारों में है।

Khushi Hamare Andar Hai – Moral Story In Hindi | खुशी हमारे अंदर है – नैतिक कहानी

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