मूर्ख नाई Murkh Naai

मूर्ख नाई | Murkh Naai


Murkh Naai Hindi Kahani | मूर्ख नाई

 
मूर्ख नाई Murkh Naai Hindi Kahani
मूर्ख नाई Murkh Naai Hindi Kahani
 

मूर्ख नाई | Murkh Naai Hindi Kahani

Murkh Naai : यह कहानी कुंतलपुर नामक शहर की है। एक समय की बात है सोमेश्वर नामक एक व्यापारी अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ रहता था। उनके पास बहुत अधिक धन संपत्ति और बहुत सी जमीन थी और वे एक आलीशान घर में रहते थे।
 
सोमेश्वर एक दयालु व्यक्ति था। वह कभी भी अपने धन पर गर्व महसूस नहीं करता था। वह बहुत मेहनती था। उसकी पत्नी लक्ष्मी एक बुद्धिमान महिला थीं। उसने कभी भी किसी को अपने घर से खाली हाथ नहीं जाने देती थी। सोमेश्वर और लक्ष्मी अपने शहर में बहुत प्रसिद्ध थे।
 
वे दोनों हर मौके पर लोगों को अपने घर में आमंत्रित किया करते थे और उनके साथ सम्मान और दया का व्यवहार करते थे। उनकी आलीशान घर पर हमेशा कोई न कोई आगंतुक आता रहता था। दोनों पति पत्नी अपने मेहमानों को महंगे उपहार और विभिन्न प्रकार के भोजन खिलाकर विदा करते थे। 
 
सोमेश्वर – लक्ष्मी देखो !  हमारे इतने शुभचिंतक हैं। जब तक ये अच्छे लोग हमारे साथ हैं, तब तक हम कभी भी भूखे या बेघर नहीं होंगे। इस बात पर लक्ष्मी बोली – अगर कभी हमारे पास धन नहीं रहेगा तो ये लोग कभी हमारे साथ खड़े नहीं होंगे। वे हमें अकेला छोड़ देंगे।
 
वे हमारे पास सिर्फ धन के लालच में आते है । सोमेश्वर अपनी पत्नी को समझाते हुए कहता है तुम जो सोच रही हो वैसा हमारे साथ कभी भी नही होगा । लक्ष्मी बोली – ईश्वर न करे की कभी ऐसा समय आए जो आपको गलत साबित करे। लक्ष्मी का डर जल्द ही सच हो गया।
 
एक दिन सोमेश्वर को पता चला कि उसका मालवाहक जहाज समुद्र में खो गया है। उसने अपना सारा माल खो दिया था। उसने जहाज की खोज की लेकिन कहीं भी उसका पता नही चला। सोमेश्वर को अपने ग्राहकों को बहुत सारा पैसा देना था। इसलिए, उसने अपने दोस्तों से मदद मांगने की कोशिश की लेकिन हर किसी ने कोई न कोई बहाना बनाकर उसे भगा दिया।
 
सब के सब बोले, वे मेरी मदद नहीं कर सकते। अब लक्ष्मी जान गई थी कि उसके दोस्त केवल बहाने बना रहे थे। लेकिन वह यह भी जानती थी कि उसका पति इस पर विश्वास नहीं करेगा। अपने ग्राहकों को पैसे लौटने के लिए उसे अपनी सारी जमीन बेचनी पड़ी। लेकिन वह अभी भी पैसे की कमी में था। इसलिए उसे अपना आलीशान घर भी बेचना पड़ा।
 
सोमेश्वर ने अपने सभी ऋणों का भुगतान कर दिया था लेकिन वह अब एक गरीब आदमी हो चुका था। वह एक छोटे से घर में रहने लगा और पैसा कमाने के लिए किसी और की जमीन पर काम करने लगा। लक्ष्मी ने भी घर में आर्थिक मदद करने के लिए छोटे मोटे काम करने लगी।
 
उन दोनों को बहुत मेहनत करनी पड़ी लेकिन फिर भी इतनी सारी समस्याओं का सामना करने के बाद भी सोमेश्वर और लक्ष्मी अभी भी दूसरों के प्रति दयालु और सम्मान का व्यवहार करते थे। वे दोनों मिलकर इतना कमा लेते थे कि वे प्रति दिन कम से कम एक मेहमान को खिला सकें।
 
उनके पास कोई महंगा उपहार या विभिन्न प्रकार के भोजन नहीं थे। समय बीत गया लेकिन कोई आगंतुक नहीं आया। जो लोग सोमेश्वर को मित्र मानते थे, अब उसकी ओर देखे बिना आगे बढ़ जाते थे। सोमेश्वर उनके इस व्यवहार से उदास हो जाता था। सोमेश्वर अपनी पत्नी से बोला –  तुम सही बोलती थी वे लोग हमारे मित्र नहीं हैं। वे केवल महंगे उपहार और हमारे आतिथ्य का आनंद लेने के लिए हमारे पास आते थे।
 
यह सब मेरी गलती है इस अपराध बोध से खुद को दोष देते हुए और खीझते हुए व्यापारी सो गया। सोने के बाद वह सपना देखा की एक ऋषि मुनी  उससे कह रहे है की मैं तुम्हारी समस्याओं को दूर करने का उपाय बता रहा हूँ।
 
अब मेरी बात सुनो ! कल मैं आपके दरवाजे पर दस्तक दूँगा इसी रूप में। मेरे सिर के पीछे के हिस्से को छड़ी से मारना। फिर मैं सोने के मूर्ति में बदल जाऊंगा। आपका सारा भाग्य जल्द ही लौट आएगा। उसके बाद आप अमीर बन जायेंगे।
 
याद रखें कि किसी अन्य ऋषि मुनी  को मत मारना नही तो आपको दंडित किया जाएगा। अरे कितना अजीब सपना है। मैं पैसे के बारे में सोचते हुए सो गया था। इसलिए ऐसा सपना आया होगा।
 
अगले दिन, उसने सुना कि कोई उसके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। वह सपने वाले ऋषि मुनी  समझकर दरवाजा खोला लेकिन बाहर नाई खड़ा था जिसको सोमेश्वर ने अपने बाल कटवाने के लिए घर पर बुलाया था।
 
 
मूर्ख नाई Murkh Naai Hindi Kahani
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दरवाजे पर एक और दस्तक होती है। दरवाजे पर उसी ऋषि मुनी को देखा जो उसके सपने आए थे। सोमेश्वर यह भूल गया की नाई उसके घर पर है और जल्दी से वह ऋषि मुनी के सर पर डंडे से प्रहार कर दिया। और फिर ऋषि मुनी सोने की मूर्ति में बदल गए।
 
इस घटना को होते हुए उसके घर में उपस्थित उस नाई ने सब कुछ देख लिया था। सोमेश्वर को जब यह ज्ञात हुआ की नाई ने यह सारी घटना को देख लिया है, तब वह इस बात को किसी और को न बता दे इसके बदले में कुछ धन दे दिया।
 
अब नाई के मन में भी धनवान बनने की इच्छा जागी। इसके लिए नाई ने एक योजना बनाई कि वह उस स्थान पर जाए जहाँ ऋषि मुनी रहते हैं और उन्हें अपने घर आमंत्रित करने गया।
 
जैसे ही ऋषियो ने घर में प्रवेश किया,  नाई ने तुरंत दरवाजे बंद कर दिया और उन्हें मारना शुरू कर दिया। ऋषि बोले तुम हमें क्यों मार रहे हो ?  उनमे से एक ऋषि जान बचाकर बाहर भागा और लोगो से दुसरे ऋषियों के लिए मदद मांगी।
 
लोगो ने उस नाई को पकड़ कर बहुत मारा। सोमेश्वर और लक्ष्मी को नाई की इस मूर्खता का पता चला कि मूर्ख नाई ने बात को समझे बिना ही काम किया ।  
 
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शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की बिना सोचे-समझे किया गया काम हमेशा मुसीबत खड़ी करती है।


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