नली का कमाल: तेनालीराम की कहानी | Nali Ka Kamaal: Tenali Raman Story

0
7

नली का कमाल: तेनालीराम की कहानी (Nali Ka Kamaal: Tenali Raman Story)- राजा कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे हुए थे। महाराज, अपने दरबारी के साथ राज्य के कार्यों का लेखा-जोखा देख रहे थे। महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में दरबारी से लेकर राजगुरु तक तेनालीराम से चिढ़ते थे। तेनालीराम को नीचा दिखाने के उद्देश्य से एक मंत्री ने खड़े होकर कहा- महाराज, आपके इस दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान और चतुर लोग हैं। यदि उन्हें अवसर दिया जाए तो हम भी अपनी बुद्धिमानी सिद्ध कर सकते हैं ,किंतु ?

किंतु! क्या मंत्री जी, महाराज कृष्ण देव ने आश्चर्य से पूछा ।सेनापति अपने स्थान से उठकर बोले- मैं बताता हूं, महाराज! मंत्री जी क्या कहना चाहते हैं। तेनालीराम के सामने किसी भी दरबारी को अपनी योग्यता सिद्ध करने की प्राथमिकता नहीं दी जाती है। उन्हें हमेशा बुद्धिमानी में कम योग्य समझा जाता है। जब तक अन्य दरबारी को अवसर नहीं मिलेगा वह अपनी योग्यता कैसे सिद्ध करेंगे।

नली का कमाल: तेनालीराम की कहानी | Nali Ka Kamaal: Tenali Raman Story

नली का कमाल: तेनालीराम की कहानी
नली का कमाल: तेनालीराम की कहानी

सेनापति की बात सुनकर महाराज समझ गए कि सभी दरबारी तेनालीराम के विरोध में है। महाराज कुछ क्षण शांत होकर सोचने लगे तभी उनकी दृष्टि कोने में लगी ठाकुर जी की प्रतिमा के सामने जलती धूप बत्ती को देखकर एक विचार आया। उन्होंने तुरंत अपने सभी दरबारी को कहा- आप सभी को अपनी योग्यता सिद्ध करने का एक अवसर अवश्य दिया जाएगा। यह सुनकर सभी दरबारी प्रसन्न हो गए। सभी उत्सुक और खुश होकर कहा- महाराज, हमें क्या करना है?

राजा ने सभी को इशारा करते हुए कहा- वहां जलती हुई धूप बत्ती को देखो, मुझे दो हाथ धुआँ चाहिए। जो भी दरबारी ऐसा कर पाएगा, उसे तेनालीराम से भी अधिक बुद्धिमान और चतुर समझ जाएगा। राजा कृष्णदेव राय की बात सुनकर सभी दरबारी आपस में धीमी आवाज में बातें करने लगे कि यह कैसा कार्य है? भला धुआं भी कभी नापा जा सकता है। सभी दरबारी अपने-अपने बुद्धि के अनुसार दो हाथ धुआँ नापने लगे। मगर सभी विफल हो गए। सभी के हाथ से धुआं लहराता हुआ निकल गया। सभी दरबारी ने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन कोई भी दो हाथ धुआँ महाराज को न दे सका।

जब सभी दरबारी थककर बैठ गए तो एक दरबारी बोला- महाराज, धुआं नापना एक असंभव कार्य है। अगर तेनालीराम ऐसा कर पाए तो हम सभी सहर्ष उन्हे सबसे बुद्धिमान मान लेंगे। किंतु, वह ऐसा नहीं कर पाए तो आप उन्हें हमारे समान ही समझेंगे। राजा मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोले, क्यों तेनालीराम क्या तुम्हें यह चुनौती स्वीकार है? तेनालीराम ने अपने स्थान से उठकर सर झुकाते हुए कहा- महाराज, मैं सदैव आपके आदेश का पालन किया है। इस बार भी अवश्य करूंगा।

तेनालीराम ने एक सेवक को बुलाकर उसके कान में कुछ शब्द कहें। सेवक तुरंत दरबार से चला गया। अब तो सभी दरबारी के अंदर उत्सुकता बढ़ने लगी कि तेनालीराम क्या करने वाले हैं। तभी सेवक शीशे की बनी दो हाथ लंबी नली लेकर दरबार में हाजिर हुआ। तेनालीराम ने उस नली का मुंह धूप बत्ती से निकलते धुंए पर लगा दिया।

थोड़ी ही देर में शीशे की नली धुएं से भर गई। तेनालीराम ने नली के मुंह पर कपड़ा लगा दिया और उसे महाराज की ओर करते हुए कहा- महाराज, यह लीजिए दो हाथ धुआँ। यह देखकर महाराज के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उन्होंने तेनालीराम से नली ले ली और दरबारियों कि तरफ दिखाया। सभी दरबारी का सिर नीचे झुक गया। परंतु दरबार में कुछ दरबारी ऐसे भी थे, जो तेनालीराम के पक्ष में थे। उन सभी की आंखों में तेनालीराम के लिए प्रशंसा के भाव थे। तेनालीराम की बुद्धिमानी और चतुराई देखकर महाराज बोले- अब तो मान गए होंगे, तनालीराम की बुद्धिमानी को। महाराज के इस बात को सुनकर सभी दरबारी चुप होकर सुनते रहे।

सीख- किसी की बुद्धिमानी से ईर्ष्या करने के बजाय उससे प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

ये कहानियाँ भी पढ़ें-

हमें फेसबुक पर फॉलो करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here