Murkh Logo Ki Suchi - Akbar Birbal Ki Kahani

मूर्ख लोगों की सूची | Murkh Logo Ki Suchi – Akbar Birbal Ki Kahani


मूर्ख लोगों की सूची – अकबर बीरबल की कहानी : बात उस समय की है, जब बादशाह अकबर दरबार में अपने दरबारियों के साथ बैठे थे। तभी उनके मन में एक बात आई और वे अचानक से बोल उठे।

Murkh Logo Ki Suchi - Akbar Birbal Ki Kahani मूर्ख लोगों की सूची - अकबर बीरबल की कहानी
Murkh Logo Ki Suchi – Akbar Birbal Ki Kahani

मूर्ख लोगों की सूची | Murkh Logo Ki Suchi

अकबर – बीरबल हमारे दरबार में बुद्धिमान लोगों की सूची है। मैं एक शहंशाह होने के नाते मेरा पूरा समय बुद्धिमान लोगों के बीच गुजरता है। मेरे मन में आजकल मूर्ख लोगों से मिलने का विचार उठ रहा है। मैं उनसे मिलकर उनसे बातें करके उनके बारे में जानना चाहता हूँ। अँगूठी चोर और तेनालीराम की कहानी

बीरबल क्या आप मेरे लिए छः मूर्ख लोग ढूंढ कर मुझसे मिलवा सकते हैं। उनसे बात करके हो सकता है कि मेरा मन प्रफुल्लित हो जाए।

बीरबल आज तक आपने सभी चुनौतियों का हल चुटकियों में निकाल लिया है। मेरे ख्याल से आप इस काम में भी जीत हासिल अवश्य करेंगे। मनुष्य का सांसारिक भ्रम

बीरबल – जी जहांपनाह, जरूर, मैं अवश्य ही उन छह मूर्ख लोगों को ढूंढ कर आप से मिलवाऊंगा।

अकबर – उन छः मूर्ख लोगों को ढूंढने के लिए हम आपको एक महीने का समय देते हैं।

बीरबल – जी जहांपनाह, लेकिन उन छः मूर्ख लोगों को ढूंढने के लिए एक महीने का समय मेरे लिए बहुत ही ज्यादा है। मैं इससे कम समय में ही उन्हें ढूंढ निकालूँगा।

अकबर – बहुत अच्छा, यह आपकी काबिलियत है कि आप उसे जल्दी ही उन्हें ढूंढ लेंगे।

बीरबल बिना समय बर्बाद किए एक पल में ही अपने घोड़े पर सवार होकर निकल पड़े, मूर्ख लोगों को ढूंढने। बीरबल रास्ते भर यही विचार करते हुए विचरण करते रहे कि कहां और कैसे मिलेंगे वह मूर्ख लोग। कवि और धनवान आदमी

तभी बीरबल को गधे पर एक आदमी बैठा दिखाई दिया, जिसने अपने सिर पर घास की गट्ठर बांध कर रखी थी। वह बड़े ही मजे से चला जा रहा था। बीरबल उस आदमी के पास जाकर उसे रोकते हैं और उससे उसकी पहचान के बारे में पूछते हैं।

बीरबल – तुम कौन हो? और यह घास की गठ्ठर अपने सिर के बजाय अपने गधे पर रखते तो तुम्हे ज्यादा सहूलियत होती। बीरबल के इतना बोलते ही उसने तुरंत अपनी पहचान बताया कि मैं रामू हूँ।

रामू – मैं इस घास की गठरी को इसलिए अपने सिर पर रखी है कि मेरा घोड़ा हम दोनों,मतलब मुझे और घास की गठरी को ढ़ोते -ढ़ोते थक गया था। इसलिए मुझे उस पर दया आ गई और मैंने इस घास को अपने सिर पर रख लिया। ताकि उसका भार कुछ कम कर सकूं। बीरबल की खिचड़ी

बीरबल को यकीन हो गया कि उसे उसका पहला मूर्ख इंसान मिल गया है।

बीरबल – बहुत अच्छा विचार है आपका। आपकी इस महान सोच के लिए मैं आप को बादशाह से इनाम दिलवाउगा।

रामू – मुझे इस बात के लिए इनाम मिलेगा! यह तो बहुत अच्छी बात है, तो फिर चलो बादशाह के पास। उसके बाद कुछ दूर चलते – चलते बीरबल को दो आदमी आपस में लड़ते दिखाई दिए। बीरबल अपना घोड़ा रोकते हुए उन लोगों से पूछते हैं –

बीरबल – रुको – रुको, तुम लोग किस बात पर आपस में लड़ाई कर रहे हो। तुम लोग कौन हो?

पहला आदमी – मेरा नाम चंगु है।
दूसरा आदमी – मेरा नाम मंगू है।

मंगू – चंगु बोल रहा है कि वह अपना शेर मेरी गाय पर छोड़ेगा।
चंगु – बिल्कुल छोडूंगा। मुझे बहुत मजा आएगा ऐसा करने में।

बीरबल हैरान होते हुए – चंगु तुम्हारे पास शेर है! कहां है शेर? और मंगू तुम्हारी गाय किधर है?

चंगु – जब भगवान हम दोनों को वरदान देने धरती पर आएँगे, तब मैं शेर मांगूगा।
मंगू – मैं भगवान से गाय मांगूगा। तभी यह अपना शेर मेरी गाय पर छोड़ने की बात कर रहा है।

बीरबल – अब बात समझ में आई। तुम दोनों मेरे साथ चलो दरबार में, मैं तुम्हें बादशाह से इनाम दिलवाउगा। मै बताऊंगा कि यह दोनों हर वक्त भगवान का नाम लेते हैं। भगवान के बारे में इतना सोचते हैं।

चंगु – मंगू दोनों खुश होते हुए बीरबल के साथ चल देते हैं।

बीरबल उन मूर्ख लोगों को अपने घर ले जाते हैं। घर ले जाकर बीरबल बचे हुए मूर्ख लोग को ढूंढने के बारे में सोचते हैं कि अब कहां ढूंढू उन्हें। कुछ विचार कर वह तीनों मूर्खों को घर पर ही रुकने को कह देते हैं और खुद बाहर चल देते हैं।

बीरबल घर से कुछ ही दूरी पर थे कि उन्हें एक आदमी क्यारियों में कुछ ढूंढता हुआ परेशान सा दिखाई दिया।

बीरबल उस आदमी के नजदीक जाकर पूछते हैं –

बीरबल – आप परेशान होकर क्या ढूंढ रहे हैं? मैं आपकी कुछ सहायता करूं।

आदमी – मेरी बहुत ही प्यारी अँगूठी गिर गई है। बहुत देर हो गई है पर अभी तक नहीं मिली इसलिए परेशान हूँ।

बीरबल – आपको कुछ जानकारी है कि आपकी अँगूठी कहां पर गिरी थी।

आदमी – मेरी अँगूठी दूर उस पेड़ के नीचे गिरी थी। लेकिन वहां अंधेरा होने के कारण मैंने सोचा कि यहां रोशनी में अपनी अँगूठी ढूंढ लूँ।

बीरबल – बहुत अच्छा सोचा आपने। मगर आप परेशान नहीं हो। मैं आपको कल बादशाह से मिलवाऊंगा और कहूँगा कि इनकी बहुत ही प्यारी अँगूठी खो गई है। इसलिए आपके पास आया हूँ।

आदमी इस बात पर हैरान मगर खुश होते हुए बीरबल के साथ चलने को तैयार हो गया।
उसके बाद अगले दिन बीरबल उन चारों को बादशाह अकबर के पास लेकर जाते हैं।
बीरबल – जहांपनाह यह है, आपके मूर्ख लोग।
अकबर हैरान होते हुए, आपने तो एक ही दिन में इस काम को कर दिया। आप बताइए कि क्या हमारे साम्राज्य में मूर्ख लोगों की बाढ़ है। आप इतने यकीन के साथ कैसे कह रहे हैं कि यह सच में मूर्ख लोग हैं।

बीरबल – बादशाह को यकीन दिलाने के लिए रास्ते में घटी चारों मूर्खों के साथ होने वाली क्रिया-कलाप को अकबर को बता दिया। अकबर को बीरबल की बातों से बहुत हंसी आती है।


अकबर – मगर यह तो केवल चार ही मूर्ख हैं। दो और मूर्ख कहां हैं।
बीरबल – बाकी के दो मूर्खों मे से, एक मैं स्वयं हूँ। जो सबसे बड़ा मूर्ख है।

अकबर – वह कैसे?

बीरबल – मैं मूर्ख इसलिए हूँ, क्योंकि मैं इन मूर्ख लोगों को ढूंढने निकल पड़ा और ढूंढ कर ले आया।

अकबर – हंसते हुए हा – हा, मैं समझ गया कि दूसरा मूर्ख कौन है। फिर भी मैं चाहता हूँ कि आप बताएं कि वह दूसरा मूर्ख कौन है?
बीरबल – वह दूसरा सबसे बड़ा मूर्ख आप हैं। जो आपने मुझे इन मूर्खों को ढूंढ कर लाने का काम सौंपा था।

अकबर – बहुत खूब, बहुत खूब बीरबल। जैसा कि मैं हर बार कहता आया हूँ कि आप का कोई जवाब नहीं। मेरी इस सल्तनत में आपकी कोई बराबरी नहीं कर सकता है। आपके पास हर सवाल का जवाब है।

बीरबल – शुक्रिया जहांपनाह शुक्रिया।


Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top